संसद में उठा राष्ट्रीय पुरुष आयोग का मुद्दा, पुरुषों के अधिकारों को लेकर नई बहस शुरू

संसद में उठा राष्ट्रीय पुरुष आयोग का मुद्दा, पुरुषों के अधिकारों को लेकर नई बहस शुरू

नई दिल्ली। महिलाओं के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग की तर्ज पर अब पुरुषों के लिए भी राष्ट्रीय पुरुष आयोग गठित करने की मांग संसद तक पहुंच गई है। राज्यसभा में एक निजी सदस्य विधेयक पेश कर पुरुषों की समस्याओं, अधिकारों और शिकायतों के समाधान के लिए अलग आयोग बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।

विधेयक पेश करने वाले सांसद का कहना है कि समाज में ऐसे कई मामले सामने आते हैं, जहां पुरुष भी घरेलू विवाद, मानसिक उत्पीड़न, झूठे आरोपों और सामाजिक दबाव का सामना करते हैं। ऐसे मामलों की सुनवाई और सहायता के लिए एक संस्थागत व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

राष्ट्रीय पुरुष आयोग की मांग को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। समर्थकों का कहना है कि पुरुषों से जुड़े मामलों के लिए अलग मंच होना चाहिए, जबकि विरोध करने वाले इसे मौजूदा संस्थाओं के दायरे में हल करने की बात कह रहे हैं।

राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाओं के बीच यह मुद्दा अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि यह अभी निजी सदस्य विधेयक है और इसे कानून बनने के लिए कई संसदीय प्रक्रियाओं से गुजरना होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि पुरुषों और महिलाओं दोनों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए संतुलित व्यवस्था आवश्यक है। आने वाले दिनों में इस विषय पर संसद और समाज दोनों में व्यापक चर्चा देखने को मिल सकती है।